Feedback

SVD Educational & Charitable Trust

Guruji’s Feedback

अबमनगर में गुरूजी के मामा के यहाँ मुलाकात हुई, मामा मतलब नंदराज चतुर्वेदी. नंदराज चतुर्वेदी द्वारा गुरूजी से परिचय मिला. चतुर्वेदी द्वारा कहा गया की कमलेश आप कुछ पूछना चाहते हे तो पूछ सकते हे. उस समय गुरूजी स्नान कर रहे थे. गुरूजी जब स्नान करके हमारे सामने आये जब बिराजमान हुई तब ऐसा लगा हमारे शरीर में कुछ उल्लाश जैसा लगा उष समय में मानसिक रूप से बीमार था. इस बीमारी का हमको ओलीवाली को मालूम था. जब गुरूजी का दर्शन हुआ उसके बाद गुरूजी के द्वारा हमारा परिचय पूछा गया चतुर्वेदी ने परिचय दिया.हमारी इच्छा कुछ जानने की हुई गुरूजी ने कागज, काम, भगवा और गुरूजी ने वह तीन कुंडलिया बताई उसके बाद गुरूजी के द्वारा दो चीजे बताई गई में सुनके के वही पे थम गया इसके बाद में विचार किया के ये सब चीजे आपको कैसे पता हो गई फिर हमारे मन में आया की आप बमतय थकते नहीं हे.

Bhakto’s Feedback

आपके बारे में मन में भी गलत विचार आ गया. हर काम उलटा होने लगता है. अगर आप की बुराई करने वाला व्यक्ति धीरे धीरे वितान तरफ जाता रहता है.आपके बारे कोई हमने संकल्प ले ली है अगर पूरा नहीं होता है हमारे लापरवाही से तो हमारा हर काम पे ब्रेक लग जाता है. अगर हमने संकट के समय आपको पुकारा है तो उष समय आप प्रगट हो जाते है. आप रक्षा करते है.आपके भक्तो को देखकर और भक्ति उत्पन हो जाती है. आप कभी बच्चे बन जाते है कभी बुजुर्ग दिखने लगते है. आपकी माया अभी तक समजमे नही आयी है. गुरूजी हमेशा कहते रहे है की सफलता अपने आप नहीं मिलती आपको उषे प्राप्त करने के लिए संकल्प लेना पड़ता है, तपस्या करनी पड़ती है, भागना दौड़ना पड़ता है, भूख प्यासा रहना पड़ता है, नींद आराम छोड़ना पड़ता है और अपमान भी सहन करना पड़ता है.